नवरात्र का पांचवा दिन… षष्ठी तिथि में करें मां कात्यायनी की पूजा… जानें पूजा विधि, महत्व और मंत्र

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आज नवरात्रि का पांचवा दिन है। मां दुर्गा के छठे रूप को कात्यायनी माता कहा जाता है। इस साल षष्ठी की तिथि कल 11 अक्टूबर को पड़ रही है। कात्यायन ऋषि की पुत्री होने के कारण मां को कात्यायनी कहा गया है। पौराणिक कथा के अनुसार कात्यायनी माता ने ही महिषासुर और शुंभ-निशुंभ जैसे आतातायी राक्षसों का वध किया था। देवी कात्यायानी की पूजा शत्रु संहार की शक्ति प्राप्त होती है, साथ ही मां संतान प्राप्ति का भी वरदान प्रदान करती हैं। नवरात्रि के छठे दिन मां के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा- अर्चना की जाती है। मां कात्यायनी का स्वरूप अंत्यत भव्य और चमकीला है। मां की चार भुजाएं हैं और मां का वाहन सिंह है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी पूजा विधि, महत्व, भोग, आरती और शुभ मुहूर्त….

मां कात्यायनी पूजा विधि…

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और फिर साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। मां की प्रतिमा को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराएं। मां को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। मां को स्नान कराने के बाद पुष्प अर्पित करें। मां को रोली कुमकुम लगाएं। मां को पांच प्रकार के फल और मिष्ठान का भोग लगाएं। मां कात्यायनी को शहद का भोग अवश्य लगाएं।मां कात्यायनी का अधिक से अधिक ध्यान करें। मां की आरती भी करें।

मां कात्यायनी की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कात्यायनी की पूजा- अर्चना करने से विवाह में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं। मां कात्यायनी की पूजा करने से कुंडली में बृहस्पति मजबूत होता है। मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाने से सुंदर रूप की प्राप्ति होती है। मां कात्यायनी की विधि- विधान से पूजा- अर्चना करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। शत्रुओं का भय समाप्त हो जाता है।  मां कात्यायनी की कृपा से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिल जाता है।

गोधुलि बेला में करें मां कात्यायनी की पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कात्यायनी ती पूजा गोधुलि बेला में यानी शाम के समय करनी चाहिए।

मां कात्यायनी का मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नम:॥

मां कात्यायनी स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

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