आज नवरात्रि के चौथा दिन… संतान पर आने वाली कष्ट का अंत करनें के लिए करें स्कंदमाता की पूजा… जानें पूजा विधि, मंत्र और भोग

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आज नवरात्रि (Navratri) की पंचमी तिथि है. आज स्कंदमाता की पूजा अर्चना होती है इस दिन मां दुर्गा की पूजा भगवान स्कंद की माता के रूप में होती है. स्कंदमाता का स्कंद अर्थात भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजन होता है. स्कंदमाता शेर को अपना वाहन बनती हैं और गोद में भगवान कार्तिकेय को धारण करती हैं. इनके पूजन से संतान प्राप्ति होती है तथा मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं. जो भी भक्त नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता का विधि पूर्वक पूजन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.

मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से संतान पर आने वाली कष्ट का अंत हो जाता है. माता को पीले रंग की चीजें अर्पित करनी चाहिए. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा करना शुभ होता है. मां अपने इस स्वरूप में स्कंद को अपने गोद में लिए में हुईं हैं. इनकी चार भुजाएं हैं दाहिन ओर ऊपर के भुजा में कमल पुष्प धारण किया है. बाएं ओर के ऊपर वाली भुजा में कमल धारण करती हैं और नीचे की भुजा वर मुद्रा में है और नीचे वाले भुजा में से स्कंदकुमार की गोद में लिए हुए हैं. आइए जानते हैं स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्रों के बारे में.

स्कंदमाता की पूजा विधि

आज नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के पांचवा स्वरूप मां स्कंदमाता की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें. इसके बाद गंगाजल छिड़क कर मूर्ति को शुद्ध करें. इसके बाद सिंदूर, रोली, धूप, फल, फूल, नैवेद्य चढ़ाएं. फिर दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें. उसके बाद स्कंद माता के मंत्रों का जाप करें और आखिर में आरती करें.

स्कंदमाता के मंत्रों का जाप करें

1-ऊँ स्कन्दमात्रै नम:

2- ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

3- या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं

स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए. माता को भोग लगाने के बाद केले को  ब्राह्माणों को दान करें. मान्यता है कि ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है और घर में सुख- समृद्धि का वास होता है.

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