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CAPF को लेकर संसद में कौन सा बिल ला रही है मोदी सरकार, क्यों हो रहा है विरोध?

By Jharkhand Junction Desk

March 13, 2026 2:54 PM

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मोदी सरकार CAPF से संबंधित संसद में एक बिल लाने जा रही है, जिसको लेकर काफी विवाद हो रहा है। एक तरफ हैं CAPF के जवान और सुप्रीम कोर्ट, वहीं दूसरी तरफ है मोदी सरकार।

CAPF का मतलब क्या होता है? सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), और असम राइफल्स (AR) को मिलाकर एक साथ CAPF बोला जाता है। सामान्य भाषा में इन्हें अर्धसैनिक बल यानी पैरामिलिट्री भी बोलते हैं।

CAPF में वर्तमान समय में DIG और IG स्तर पर सामान्यतः भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की ही पोस्टिंग होती है।
CAPF के अधिकारियों का इस पर कहना है कि उनकी नियुक्ति भी UPSC के माध्यम से होती है। एग्जाम, इंटरव्यू और सारी प्रक्रिया को पूरी करके वे लोग का CAPF में आते हैं। इसके बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय सीमा, जम्मू कश्मीर और उत्तर पूर्वी क्षेत्र जैसे दुर्गम और काफी कठिन स्थान पर बहुमूल्य सेवा देते हैं, लेकिन जब प्रमोशन का समय आता है तो सामने आईपीएस अधिकारी आ जाते हैं।
क्योंकि डीआईजी और आईजी स्तर पर आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग होती है तो CAPF के अधिकारी 10 साल से 15 साल तक सेवा देने के बावजूद प्रमोशन नहीं ले पाते, और स्थिति ऐसी है कि असिस्टेंट कमांडेंट और कमांडेंट जैसे पदों पर ही लंबे समय तक कार्यरत रहते हैं।

मई 2025 में यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है। विस्तृत सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट में CAPF की जीत हो जाती है। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अगले दो वर्षों में गृह मंत्रालय आईजी रैंक तक के IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम से कम करें, साथ ही CAPF के ग्रुप A अधिकारियों को Organised Group A Service (OGAS) का दर्जा दे।

गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगा दी, लेकिन अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका को खारिज कर देता है।

काफी समय गुजरने के बाद भी 2026 के शुरुआत तक गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और आगे कोई भी निर्णय नहीं लिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका लगाई जाती है। मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट में गृह मंत्रालय ने एक एफिडेविट दिया कि आदेश के अनुसार सुधार के लिए 18 से 20 महीने का समय चाहिए क्योंकि काफी जटिल प्रक्रिया है।

इसके बाद 10 मार्च को मोदी कैबिनेट ने केंद्रीय पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) बिल को मंजूरी दे दी। ऐसा बोला जा रहा है कि बिल के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया जाएगा। अब इस नए बिल का विरोध करते हुए बोला जा रहा है कि मोदी सरकार IPS लॉबी के सामने झुक गई।

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