झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं की जिंदगी पिछले कुछ समय से लगातार परीक्षा, पेपर लीक, सीटों की बिक्री, परीक्षा रद्द होने और फिर जांच के बीच उलझी हुई है।
इसी पूरी कहानी में जेएसएससी-जेपीएससी परीक्षा विवाद, कथित धांधली और टीडीपीएल कंपनी से जुड़ी कथित लेनदेन की बात सामने आई है।
अभय तिवारी की गिरफ्तारी से शुरू हुई नई कड़ी
बीते 22 जुलाई को झारखंड पुलिस ने गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी यानी बीएसओ अभय तिवारी को गिरफ्तार किया। उन पर जेपीएससी में धांधली करने का आरोप है।
गिरफ्तारी के बाद अभय तिवारी ने सीआईडी के सामने पूछताछ के दौरान कई बातें बताईं। जांच एजेंसी के सामने दिए गए उनके कथित कबूलनामे से झारखंड के परीक्षा सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
जांच में सामने आई बातों को झारखंड जंक्शन ने अभय तिवारी के कथित कबूलनामे और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट किया है।
TDPL को JPSC का काम दिलाने की बात
अभय तिवारी के कथित कबूलनामे के मुताबिक, टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी में ओटीआर, ओएमआर स्कैनिंग, ओएसआरएम, एडमिट कार्ड जनरेट करने और अटेंडेंस शीट प्रिंटिंग जैसे काम दिलाने की बात हुई थी।
इसके लिए कथित तौर पर 20 से 25 लाख रुपये कमीशन की मांग की गई थी। साथ ही यह भी कहा गया कि कंपनी को काम मिलने के अलावा उसके कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने में मदद की जाएगी।
जब इस मामले की जानकारी टीडीपीएल के निदेशकों में से एक रामवीर सिंह को दी गई तो वह कथित तौर पर तुरंत इसके लिए तैयार हो गए।
इसके बाद रामवीर सिंह ने अभय तिवारी के कहने पर अपनी कंपनी से जुड़े जरूरी कागजात उन्हें सौंप दिए। बदले में अभय ने कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि वह जेपीएससी में टीडीपीएल का प्रेजेंटेशन करवा देंगे।
रांची के होटल रेडिशन ब्लू में हुई बैठक

प्रेजेंटेशन से पहले अभय तिवारी, आनंद उर्फ सानंद प्रकाश, टीडीपीएल के दोनों निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह की मुलाकात जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते से हुई।
यह बैठक होटल रेडिशन ब्लू के वाटरफ्रंट के सामने स्थित रेस्टोरेंट में हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी बातचीत के दौरान ख्यांगते ने टीडीपीएल की क्षमता को लेकर जानकारी ली।
मोरहाबादी मैदान में मुलाकात और 2 करोड़ की कथित डील
इस मुलाकात के दो दिन बाद अध्यक्ष और अन्य सदस्यों के सामने टीडीपीएल का प्रेजेंटेशन हुआ। प्रेजेंटेशन खत्म होने के बाद एल. ख्यांगते ने रामवीर सिंह को अभय तिवारी से मिलने के लिए कहा और कंपनी की फाइल परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को सौंप दी।इसके बाद अभय ने कहा कि आगे की बातचीत वही करेंगे। कुछ समय बाद अभय तिवारी, रामवीर सिंह और धर्मेंद्र की मुलाकात मोरहाबादी मैदान में हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुलाकात के बाद धर्मेंद्र ने तय किया कि जेपीएससी के चेयरमैन साहब यानी एल. ख्यांगते को काम दिलवाने के बदले खुद 20 से 25 लाख रुपये बतौर कमीशन देगा।
इसके अलावा कुछ छात्रों को पास कराने के लिए भी शर्तें तय की गईं। कथित तौर पर टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी से मिलने वाली रकम में से 20 प्रतिशत हिस्सा अलग से एल. ख्यांगते को देना था।
बताया गया कि कंपनी के दोनों निदेशकों को इन शर्तों से कोई परेशानी नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, एक-एक सीट के बदले छात्रों से 30 से 40 लाख रुपये मिलने की बात थी।
एल. ख्यांगते ने लगातार संपर्क में रहने को कहा

मोरहाबादी की मुलाकात के बाद करीब कुछ सौ मीटर दूर स्टेट गेस्ट हाउस के एक कमरे में दोबारा बातचीत हुई।
इस बातचीत के दौरान एल. ख्यांगते ने टीडीपीएल के दोनों निदेशकों से साफ तौर पर कहा कि वे लगातार धर्मेंद्र के संपर्क में रहें।
इसके बाद जून 2025 में टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी से सभी परीक्षाएं कराने का एग्रीमेंट मिल गया। इसके तुरंत बाद कंपनी को वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया।
सीआईडी की जांच में अब तक क्या-क्या हुआ?
अब पूरी कहानी का दूसरा हिस्सा जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ता है।
इस परीक्षा के लिए 27 फरवरी 2026 को रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 9 मार्च कर दी गई थी। इस भर्ती में कुल 103 पद थे।
इसके बाद 8 अप्रैल 2026 को प्रारंभिक परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी हुआ और 19 अप्रैल 2026 को 14वीं सिविल सेवा की प्रारंभिक यानी पीटी परीक्षा राज्यभर में आयोजित की गई।
इसके बाद 2 जुलाई को परीक्षा का रिजल्ट जारी हुआ। कुल 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई हुए। मुख्य परीक्षा 18 से 20 जुलाई के बीच कराने की तारीख तय हुई।
लेकिन रिजल्ट आने के साथ ही सवाल उठने लगे।
48 सवाल वाली OMR शीट से विवाद
श्रेणीवार कटऑफ जारी होने से पहले ही एक अभ्यर्थी की ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसमें सिर्फ 48 सवालों के जवाब भरे हुए थे। इसके बावजूद उस अभ्यर्थी का सिलेक्शन हो गया।
इसको लेकर आरोप लगाया गया कि रिजल्ट आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर के बिना ही जारी कर दिया गया था।
JPSC कार्यालय में सीआईडी की कार्रवाई
बीते 20 जुलाई को सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की और तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया।
उसी दिन देर शाम राज्य के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके और जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया। अगले दिन यानी 21 जुलाई को राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
इसी दिन एफआईआर भी दर्ज की गई।
23 जुलाई को जांच CID को सौंपी गई
23 जुलाई 2026 को सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी।
इसके बाद सीआईडी ने कुल 8 स्थानों पर छापेमारी की। इनमें जेपीएससी मुख्यालय, परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल का दफ्तर और पूर्व चेयरमैन का सरकारी आवास भी शामिल था।
इन छापों के दौरान डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पूर्व चेयरमैन से करीब 32 घंटे पूछताछ
28 जुलाई से 1 अगस्त तक सीआईडी ने पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते से लगभग 32 घंटे तक पूछताछ की।
अब तक इस मामले में कुल 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
इनमें टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी, अकाउंटेंट रक्षक सिंह, तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान और एजाज समेत कई कर्मचारी शामिल हैं।
आयोग की ओर से उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, कर्मी सोनू कुमार और कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार को भी जेल भेजा जा चुका है।
इसके अलावा गलत तरीके से परीक्षा पास करने वाले चार अभ्यर्थियों और तीन दलालों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
कथित डील में कौन-कौन सी बातें सामने आईं?
पूरे मामले में सामने आए कथित कबूलनामे के अनुसार, टीडीपीएल को जेपीएससी में ओटीआर, ओएमआर स्कैनिंग, ओएसआरएम, एडमिट कार्ड तैयार करने और अटेंडेंस शीट प्रिंटिंग का काम दिलाने की बात हुई थी।
इसके बदले 20-25 लाख रुपये कमीशन की मांग की गई थी।
इसके साथ ही कुछ अभ्यर्थियों को पास कराने की बात भी सामने आई। कथित तौर पर प्रत्येक सीट के बदले छात्रों से 30-40 लाख रुपये लिए जाने थे।
कंपनी को जेपीएससी से जो भुगतान मिलता, उसका 20 प्रतिशत हिस्सा एल. ख्यांगते को अलग से देने की बात भी कथित डील में शामिल थी।
रिपोर्ट के अनुसार, धर्मेंद्र ने यह भी तय किया था कि चेयरमैन को 2 करोड़ रुपये और काम दिलाने के एवज में खुद 20-25 लाख रुपये बतौर कमीशन दिए जाएंगे।
इसके अलावा टीडीपीएल कंपनी को काम दिलाने के साथ कुछ अभ्यर्थियों को पास कराने की बात भी कथित तौर पर तय हुई थी।
अब आगे क्या होगा?
इस पूरे मामले में जांच अभी जारी है। सीआईडी जेपीएससी के अधिकारियों, टीडीपीएल कंपनी के कर्मचारियों, कथित बिचौलियों और अभ्यर्थियों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
अगली कड़ी में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जेपीएससी के दूसरे अधिकारी और कर्मचारी किस तरह इस पूरे नेटवर्क से जुड़े थे, कौन-कौन से कोचिंग संस्थानों के संचालकों की भूमिका सामने आती है, छात्रों से उनकी कथित मुलाकातें कैसे हुईं और अभय तिवारी का पूरा नेटवर्क किस तरह काम करता था।
यानी मामला केवल एक परीक्षा या कुछ लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित है या इसके पीछे इससे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
झारखंड के युवाओं का अनश्चितकालीन धरना जारी
मामले की शुरुआती जानकारी आने के बाद ही 29 जुलाई से झारखंड के युवा रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
हेमंत सोरेन सरकार पर दबाव बनने के बाद, सरकार की तरफ से चार मंत्रियों ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से पहले चरण बातचीत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया।
छात्रों की मांग है कि 14वीं JPSC, JSSC CGL सहित वो सभी परीक्षा रद्द की जाए जिसे टीडीपीएल कंपनी ने लिया था या
इसके अलावा आगे किसी भी परीक्षा में धांधली ना हो और परीक्षा समजिसमें अभय तिवारी शामिल था।
साथ ही युवा चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से हो क्योंकि उन्हें राज्य सरकार की सीआईडी पर भरोसा नहीं है।
य पर बिल्कुल पारदर्शिता के साथ हो इसलिए कुछ रिफॉर्म की मांग भी की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्रों का कहना है कि अगर सरकार मांगों को नहीं मानती है तो 10 अगस्त को विधानसभा मार्च होगा जिसमें पूरे राज्य से बड़ी संख्या में युवा शामिल होंगे।

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