वो पहला नेता जिसे आजाद भारत में सुनाई गई थी फांसी की सजा… DM की की थी हत्या…

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हमारे देश में न जाने कितने ही बाहुबली यहां की मिट्टी को खून से लाल करते आए हैं। लेकिन एक ऐसे बाहुबली राजनेता थें जिन्हें आजाद भारत में फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, इस सजा को बाद में ऊंची अदालत ने उम्र कैद में बदल दिया जिसके तहत ये बाहुबली आज भी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। उस बाहुबली का नाम पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह है। आनंद मोहन के बारें में कहा जाता है कि वो 17 साल की उम्र में ही सियासत की शुरुआत कर दी थी।

आनंद मोहन सिंह पर कई मामलों में आरोप लगे। लेकिन 1994 में एक मामला ऐसा आया, जिसने ना सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया। दरअसल, जिस समय आनंद मोहन ने अपनी चुनावी राजनीति शुरू की थी, उसी समय बिहार के मुजफ्फरपुर में एक नेता छोटन शुक्ला से आनंद मोहन की दोस्ती काफी गहरी थी। 5 दिसंबर 1994 को छोटन शुक्ला की हत्या कर दी गई। जिसके बाद आनंद शुक्ला ने छोटन शुक्ला की लाश के साथ राजनीतिक रैली निकाली। इस रैली में जुटी भीड़ ने दलित आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आनंद पर आरोप था कि उन्हीं के कहने पर भीड़ ने जी कृष्णैया की हत्या की। इस मामले के आनंद, उनकी पत्नी लवली समेत 6 लोगों को आरोपी बनाया गया। साल 2007 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई। हालांकि, 2008 में इस सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया। साल 2012 में आनंद सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से सजा कम करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और वे आज भी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। दरअसल, कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर उनकी पत्नी और पूर्व सांसद लवली आनंद और बेटे विधायक चेतन आनंद ने उनकी रिहाई की मांग उठाई है। आनंद मोहन की रिहाई के लिए उनके परिवारवालों के साथ-साथ समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ रखी है। इधर, कोरोना के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने भी 7 मई को फैसला लिया कि कैदियों की सजा पर विचार करते हुए उन्हें टेम्पररी जमानत या पैरोल पर रिहा कर जेल की भीड़ को कम किया जाए। ऐसे में देखना होगा कि आनंद मोहन को जेल से रिहाई मिलती है या नहीं।

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