छप रही थी एनसीईआरटी की फर्जी किताबें… मास्टर माइंड हुआ गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनसीईआरटी की फर्जी किताबें छापने के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है. आरोपी मनोज जैन शाहदरा ईस्ट नत्थू कॉलोनी का रहने वाला है। वे पिछले कुछ वर्षों से प्रिंट प्रेस चला रहे हैं। वे पिछले कुछ समय से एनसीईआरटी की पायरेटेड किताबें प्रिंट प्रेस में प्रकाशित कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मनोज एक प्रिंट प्रेस में काम करता है लेकिन इसे एक साल पहले स्थापित किया था।

पिछले साल लॉकडाउन के दौरान उन्हें भारी व्यावसायिक नुकसान हुआ, जिसकी पूर्ती के लिए उन्हें पायरेटेड किताबे छपने का सुझाव आया. डीसीपी क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन यूनिट राजेश देव के मुताबिक 18 सितंबर को मेला राम फार्म मंडोली प्रेस में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने 5000 पाइरेटेड किताबें और 80000 प्रिंटेड कॉपी जब्त कर ली. 166 मेटालिक प्लेट, दो ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस और भारी मात्रा में एनसीईआरटी वाटर मार्क वाले प्लेन पेपर बरामद किए गए थे. छापा के समय पुलिस के साथ सुरक्षा गार्ड और एनसीईआरटी की टीम भी थी। लेकिन रेड के बाद से इस धंधे का मास्टरमाइंड मनोज जैन तब से ही फरार चल रहा था, जिसे पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस का दावा है कि पूछताछ में मनोज ने खुलासा किया कि ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उसने एनसीईआरटी की पायरेटेड किताबों को छापना शुरू किया था, क्योंकि ये किताबें पूरे भारत में बड़े पैमाने पर प्रचलन में हैं. प्राइवेट स्कूलों में पहले निजी प्रकाशन की महंगी किताबों को खरीदने के लिए छात्रों पर दवाब बनाया जाता था. इसके लिए स्कूलों को मुनाफा मिलता था. लेकिन इसकी शिकायत के बाद सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को अनिवार्य करने का फैसला लिया, जिससे अचानक इन किताबों की मांग में तेजी आ गई. इसी का फायदा उठाने के लिए आरोपी ने किताबों की पायरेसी का धंधा शुरू कर दिया. वह कम कीमत में दुकानदारों को किताबें उपलब्ध कराने लगा और दुकानदार भी ज्यादा मुनाफे के लालच में उन किताबों को बेचने लगे.

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