राजनीति के चलते बुझ गया किसी के घर का दीपक

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कहावत सुनी होगी कि गेंहू के गेहूं के साथ घुन भी पिसता है यही कुछ हुआ लखीमपुर खीरी तिकुनियां थाना क्षेत्र में रविवार को हुए दंगे में ड्राइवर फरधान के साथ, थाना क्षेत्र के परसेहरा बुजुर्ग निवासी हरिओम की मौत के बाद उसके घर में सन्नाटा पसरा है। घरवाले उस वक्त को कोस रहे हैं, जब ऐसी घटना घटी।

फरदान थाने के पास परसीरा बोहाली गांव निवासी हरिओम के चाचा चंद्रभाल ने बताया कि यहां दो लड़के और तीन लड़कियों समेत पांच बच्चे हैं. हरी ओम मिश्रा दो बच्चों में सबसे छोटा था। हरी ओम, अजय मिश्रा टेनी मौजूदा गृह मंत्री खीरी के लिए पिछले दस साल से गाड़ी चलाने का काम कर रहा था। जब से वह विधायक थे, तभी से हरिओम उनके यहां ड्राइवर था और अपने बीमार पिता का इलाज कराने के साथ-साथ घर के सारे खर्च उठाता था।

दो बहनों की शादी की। इसके बाद एक छोटी बहन और एक छोटे भाई साथ में बूढ़े मां बाप के साथ घर चला रहा था।
चाचा चंद्रभाल ने बताया कि घर की हालत ठीक ना होने के कारण हरिओम ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सका था। कमाने खाने के चक्कर में ड्राइवरी लाइन पकड़ ली बाद में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के यहां नौकरी करने लगा।

उन्होंने बताया कि इस वक्त हरिओम आशीष मिश्र उर्फ मोनू की गाड़ी चलाता था। तीन अक्तूबर रविवार को जिले में होने वाले डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी का भी कार्यक्रम था। जिसके चलते उनकी गाड़ियों में से एक गाड़ी हरिओम मिश्रा भी चला रहे थे। दंगाइयों की झड़प में हरिओम मिश्रा की जान चली गई।

हरिओम की मौत के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। घरवालों का रो रो कर बुरा हाल है हर व्यक्ति की जुबान पर अब यही बात है बीमार बाप और माँ भाई बहन की देखभाल कौन करेगा। घरवालों का कहना है कि रविवार को हुए तिकुनिया कांड में मृतक हरिओम मिश्रा के अंतिम संस्कार में कोई भी भाजपा नेता नहीं पहुंचा। यहां तक कि थाना पुलिस ने भी मौके पर जाकर जानकारी लेने और न किसी अप्रिय घटना होने के बचाव की तैयारी की। नेता और पुलिस के न पहुंचना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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