चाईबासा में पुलिस करा रही है बच्चों की मानव तस्करी?… लोगों ने लगाया गंभीर आरोप..

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एक तरफ जहां नक्सल प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों का विश्वास जीतने की पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है, तो वहीं कुछ पुलिस, पुलिस की छवि पर गहरा दाग लगा रहें है। चाईबासा के कराईकेला में पुलिस ने ना सिर्फ ग्रामीणों की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि उन्हें छोड़ने के एवज में पैसे भी मांगे। ग्रामीणों की गलती बस इतनी सी थी की गैरकानूनी तरीके से बच्चों की तस्करी होने से रोक रहे थे।

बताया जा रहा है कि बंदगांव के लान्दुपदा गांव में शनिवार की रात ग्रामीणों ने पुडुचेरी की एक बस को मानव तस्करी के शक में रोका था। इस बस में बिना रजिस्ट्रेशन के नाबालिग बच्चियों को काम कराने के बहाने कोयम्बटूर ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली, तो ग्रामीणों ने बस चालक को रोक कर पूछताछ की और उसके बाद कराईकेला थाने की पुलिस को फोन कर मौके पर बुलाया। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने उल्टे ग्रामीणों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया। पुलिस बस में बैठी बच्चियों के साथ बस चालक, खलासी और बस को रोकने वाले आठ ग्रामीणों को थाने ले गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस ने रातभर थाने में उनकी पिटाई की। इसके अलावा उन्हें छोड़ने के एवज में दस-दस हजार रुपये भी मांगे। वहीं, इसके बाद मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाई गयी बच्चियों को वापस उनके घर भेज दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों की पिटाई का मामला चक्रधरपुर के पूर्व विधायक शशिभूषण सामड के पास पहुंचा। शशिभूषण सामड ने पुलिस कप्तान अजय लिंडा को मामले की जानकारी दी। एसपी के दबाव में कराईकेला पुलिस ने ग्रामीणों को छोड़ दिया। शशिभूषण सामड ने पुलिसकर्मियों पर मानव तस्करी के कारोबार को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया। इस पूरे मामले में कराईकेला थाना प्रभारी ने सभी आरोपों को निराधार बताया।

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