गोबर के ढेर से कमाते हैं 20 लाख रु… इसके लिए छोड़ दी डेढ़ लाख की नौकरी

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हरियाणा के कर्नाल जिले के रहने वाले हैं निर्मल सिंह सिद्धू। एक वक्त था जब वो बड़ी कंपनी में लाख रुपए की नौकरी करते थे। अब नौकरी छोड़कर गोबर से खाद बनाते हैं और सालाना 20 लाख रुपए कमाते हैं। सबसे खास बात ये है कि वो इसे सिर्फ आधे एकड़ जमीन में ही तैयार करते हैं। गोबर से खाद जिसे वर्मी कंपोस्ट या केचुआ खाद भी कहा जाता है। आधे एकड़ जमीन में तैयार वर्मी कंपोस्ट से उन्हें लगभग 20 लाख सालाना आमदनी हो जाती है। बड़ी बात ये है वो इस पेशे को बिना लागत का कारोबार कहते हैं। इसे बिना लागत वाला कारोबार क्यों कहते हैं इसे जानने के लिए ये समझना होगा कि गोबर से वर्मी कंपोस्ट कैसे तैयार होता है।

गोबर से कैसे तैयार होता है वर्मी कंपोस्ट ?

गोबर से खाद बनाने के लिए बेड तैयार किया है। बेड मतलब खाद के लिए बिस्तर। खाद का बिस्तर जमीन पर ही तैयार होता है। इसके लिए जमीन के एक हिस्से में प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है। उसपर हल्का गीला गोबर रखा जाता। गोबर में केचुआ छोड़ा जाता है। फिर गोबर को पुआल, पराली या नार से ढक दिया जाता है। गर्मी में रोजाना हल्के पानी का छिड़काव करना पड़ता है, ताकि गोबर में नमी बनी रहे। करीब 40 दिन में गोबर से वर्मी कंपोस्ट की पहली खाद तैयार हो जाती है। 60 दिन में गोबर पूरी तरह से खाद में बदल जाता है। इसके बाद इसे छान कर खेतों, पौधों में डाला जा सकता है। गोबर से बने वर्मी कंपोस्ट को बेचकर अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है।

गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के दौरान कुछ सावधानी

गोबर को बेड पर डालने से पहले उसमें दो से तीन दिन तक पानी डालना चाहिए। इसके बाद गोबर का गीलापन खत्म होने के लिए छोड़ दें। ऐसा करने से गोबर से मिथेन गैस निकल जाती है। ऐसे गोबर में केचुए आसानी से रह सकते हैं। अगर गोबर में मिथेन गैस होगी तो इससे गोबर गर्म रहेगा, जो केचुओं के लिए हानीकारक है। ऐसे गर्म गोबर में केचुए मर जाते हैं। हेमाशा ध्यान रखें कि बेड पर लगे गोबर में कम से कम 40% नमी बनी रहनी चाहिए। इसके लिए गोबर में गर्मी में रोज और सर्दी में हर दूसरे या तीसरे दिन पानी का छिड़काव करते रहें। गोबर ज्यादा गीला और ज्यादा सूखा रहने से भी केचुए मर जाते हैं। बेड के चारों तरफ ईंट लगाएं, ताकि केचुए गोबर से बाहर ना निकल पाएं। आसपास घांस ना जमा ना उगने दें। अगर घांस उगे तो उसके सहारे केचुए जमीन के अंदर चले जाएंगे। सबसे खास बात बेड हमेशा ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां पानी जमा ना हो। ये भी सुनिश्चित करें कि केचुओं को पर्याप्त हवा मिलती रही। हवादार जगह पर ही गोबर का बेड लगाना चाहिए।

वर्मी कंपोस्ट से कितना कमा सकते हैं ?

आजकल कैमिकल वाले खाद की वजह से अनाज, फल-सब्जियां दूषित होती जा रही हैं। शहरों के लोग इसे लेकर जागरूक हो रहे हैं। शहरो में अपने गार्डन में  लोग वर्मी कंपोस्ट के सहारे सब्जी उगा रहे हैं। अपने घर में लगे गमलों में भी वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करते हैं। आपके हैसले के लिए एक दिलचस्प आपको बताना चाहेंगे कि भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मेहंद्र सिंह धोनी रांची में अपने फार्म में भी ऑर्गेनिक (केचुआ खाद) खाद का ही इस्तेमाल करते हैं। शहरों में इस खाद की काफी डिमांड है। अगर आप थोक में गोबर से बने वर्मीकंपोस्ट को बेचते हैं तो करीब 6 रु. किलो बिकता है। खुदरे में छोटा पैकेज 20 रु. प्रति किलो तक बिकता है। एक छोटे से क्यारी नुमा बेड़ में साल में 5 बार वर्मी कंपोस्ट तैयार हो सकता है। यानी साल में करीब 6 क्विंटल गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार हो सकता है। यानी एक बेड में 30 से 35 हजार की आमदनी। आधे एकड़ में तो दर्जनों वर्मी कंपोस्ट के बेड लगा सकते हैं। गोबर से खाद बनाने के लिए आजकल बाजार में अच्छे किस्म के केचुए भी उपलब्ध हैं। इनकी कमीत 300 रु. प्रति किलो है।

निर्मल सिंह सिद्धू को वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रेरणा कैसे मिली

निर्मल सिंह सिद्धू चाहते थे कि उन्हें और उनके परिवार को रसायनिक खाद मुक्त खाना मिले। इसके लिए वो खेती से जुड़े। खेती के लिए उन्होंने गोबर से खाद बनाना शुरू किया और आज वो 20 लाख रुपए सालाना बिना किसी तनाव के कमाते हैं। ये कारोबार ना सिर्फ उन्हें खुशी देता है बल्कि एक अच्छी आमदनी भी। एक बजय ये भी है कि वो अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहते थे। वो ऑफिस के तनाव भरे माहौल से तंभ भी आ चुके थे।