‘वर्क फ्रॉम होम’ के नाम पर ठगी का नया खेल… साइबर ठगों की नजर अब बेरोजगारों पर…

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इस कोरोना संक्रमण में साइबर ठगों ने ठगी का नया खेल शुरू कर दिया है। बेरोजगार युवक जो ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम की नौकरी खोज रहे हैं वैसे लोग इन साइबर ठगों के निशाने पर हैं। वर्क फ्रॉम होम के नाम पर बेरोजगारों की बची हुई थोड़ी बहुत कमाई पर भी साइबर अपराधी डाका डाल रहे है। इस ठगी के खेल को स्मार्ट तरीके से बात करने वाली युवती, फर्जी पुलिस और वकील मिलकर ये पूरा खेल खेलते हैं।

साइबर अपराधी फर्जी कंपनी के नाम पर लोगों से संपर्क करते हैं। फर्जी तरीके से एग्रीमेंट भी कराया जाता है। फर्जी एग्रीमेंट को सही साबित करने के लिए साइबर अपराधी सरकारी वकील और पुलिस अधिकारी फेक आईडी बनाकर उसका इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद एक ल़डकी फोन करती है। फोन पर बताती है कि आप घर बैठे लैपटॉप या कंप्‍यूटर पर काम करते हुए केवल एक हफ्ते में ही 30 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। इसके लिए आपको केवल बायोडाटा ऑनलाइन भरना होगा। फोन पर बताया जाता है कि इस जॉब के लिए उन्‍हें न तो एक रुपया खर्च करना है और न हीं कहीं जाने की जरूरत है। केवल एक ईमेल आइडी और एक पहचान पत्र उपलब्‍ध कराते ही जॉब के लिए रजिस्‍ट्रेशन हो जाएगा। रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक वेबसाइट का एड्रेस, यूजर आइडी और पासवर्ड दे दिया जाएगा। जिसके बाद आपकी नौकरी ऑनलाइन शुरू हो जाएगी।

एग्रीमेंट में यह शर्त होती है कि अगर तय समय के अंदर आपने काम छोड़ा तो आपको एक रकम का भुगतान जुर्माने के रूप में करना होगा। काम शुरू करने के समय ही साइबर अपराधी झांसा देते हैं कि अगर 10 दिन का काम 2 दिन में कर देंगे तो 5 हजार रुपये अधिक दिए जाएंगे। आप वह काम दो दिन में ही पूरा कर देते हैं तो उधर से कहा जाता है कि आपने काम ठीक नहीं किया है। जब आप दोबारा काम करके देते हैं तब भी यही कहा जाता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें काफी मुश्किल काम दिया जाता है और वह कर नहीं पाते हैं। परेशान होकर लोग इस काम को एक से दो दिन में छोड़ देते हैं। जॉब छोड़ते ही वकील और पुलिस के फोन आने लगते है। एग्रीमेंट की कॉपी को ब्‍लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता है। साइबर अपराधी नौकरी छोड़ने वाले को कहते हैं कि आप काम पूरा नहीं कर पाए। इसके चलते कंपनी को काफी नुकसान हुआ है। अब आपको एग्रीमेंट की शर्त के मुताबिक 35 से 40 हजार तक हर्जाना देना होगा। अलग-अलग ठगों ने अलग-अलग रेट फिक्‍स कर रखा है। इसके लिए वे आपको फोन करेंगे या किसी वकील और पुलिस के जरिये फोन कराएंगे। आपको मैसेज भेजेंगे और ईमेल पर लीगल नोटिस भी भेजेंगे। डराया तो यहां तक जाता है कि रुपये शाम तक नहीं देने पर एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी। इसके बाद कोर्ट में आकर मुकदमे के खर्च के साथ ही पूरा हर्जाना देना होगा। साइबर अपराधी इतने शातिर हैं कि वे मुकदमे का नंबर और अगली तारीख पर उपस्थित होने का फर्जी नोटिस तक भेज देते हैं। यह पूरी साजिश इतने शातिराना तरीके से की जाती है कि ज्‍यादातर लोग डरकर खुद ही साइबर अपराधियों के खाते में रुपये भेज देते हैं। डेटा इंट्री से जुड़े फ्रॉड की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने परिवार और मित्रों को भी शेयर करें ताकि और कोई और इस जाल में न फंसे। ऐसी कोई भी घटना हो तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें।