11 साल बाद परिवार से मिली बेटी… थम नहीं रहा आंसू…

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11 साल बाद  18 साल की एक लड़की के जीवन में खुशियों भरा पल आया। वो 11 साल बाद अपने परिवार से मिली। पिता, बहन और अपने रिश्तेदारों को देख वह रोने लगी। आप को बता दें कि पीड़िता जब 7 साल की थी, तब मानव तस्करों ने उसे दिल्ली में बेच दिया था। वो 14 साल की उम्र तक दिल्ली में घरेलू काम करती रही। जब पुलिस ने 2016 में उसे दिल्ली के एक घर से मुक्त कराकर CWC गुमला को सौंप दिया था। काफी प्रयास और खोजबीन के बाद पीड़िता का घर बिहार राज्य के जमुई में मिला। परिवार वाले गुरुवार को जमुई से गुमला पहुंचे। सारी कागजी कार्रवाई के बाद उसे अपने साथ ले गये।

 बेची गयी थी पीड़िता  

पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि जब वो 7 साल की थी, तभी उसे कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था और दिल्ली में एक प्लेसमेंट एजेंसी को बेच दिया, उसे एक घर में बच्चों की देखभाल के लिए रखा गया, फिर जैसे- जैसे उम्र बढ़ती गयी, उससे घरेलू काम कराया गया, पुलिस ने उसे 14 साल की उम्र में एक घर से मुक्त कराया था। लेकिन, उसके घर का पता नहीं मिलने के कारण दिल्ली पुलिस ने उसे CWC, गुमला को सौंप दिया था। 4 साल तक वो CWC के संरक्षण में गुमला के बालगृह में रही। 11 साल बाद वो गुरुवार (8 अप्रैल, 2021) को 18 साल की उम्र में अपने परिवार से मिली।

  मिलने की उम्मीद खत्म हो गयी थी

पीड़िता के पिता, बड़ी बहन, रिश्तेदार गुरुवार को CWC, गुमला ऑफिस पहुंचे। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे अपने साथ जमुई ले गये। पीड़िता के पिता ने कहा कि 7 साल की उम्र में उसकी बेटी को कोई उठाकर ले गया था। तब से वह  अपनी बेटी को खोज रहे थे। धीरे-धीरे बेटी के मिलने की उम्मीद भी खत्म हो गयी थी। लेकिन 5 महिने पहले अचानक उनके पास कुछ अधिकारी आकर बेटी का फोटो दिखाये। जिसके बाद बेटी की मिलने की उम्मीद जगी। और आज बेटी मेरे साथ है।

 पीड़िता को मिला अपना परिवार  

CWC, गुमला की सदस्य सुषमा देवी और संजय भगत का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने जब पीड़िता को गुमला में लाकर सौंपा, तो उसके घर की तलाश शुरू की गयी। काफी मेहनत के बाद 6 महिने पहले उसका घर जमुई में मिला। इसके बाद CWC जमुई से संपर्क किया गया। कुछ अधिकारी से पीड़िता का फोटो भेजकर परिवार के लोगों को दिखाया गया। पीड़िता का पहचान होने पर परिवार के लोग उससे मिलने के लिए गुरुवार को गुमला पहुंचे और पीड़िता को अपने साथ ले गये। सुषमा देवी ने कहा कि पीड़िता के घर मिलने में देरी होने के कारण उसका नामांकन गुमला के कस्तूरबा स्कूल में भी करा दिया गया था। जहां उसकी पढ़ाई हो रही थी। अब वह अपने गांव में रहकर पढ़ेगी।