JHARKHAND: फाइनेंस के वाहनों की बुरी दशा ढाई साल से नही जमा किश्तें छलका हजारीबाग बस ड्राइवरों का दर्द

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हजारीबाग: पिछले दो साल से कोरोना महामारी के चलते देश और दुनिया के जो हालात रहे वह भयानक होने के साथ समस्याओं से भी ग्रस्त है कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए लगाये गये लॉकडाउन से हर कोई प्रभावति हुआ है. कई लोग तो इससे उबर रहे हैं पर कई की हालत अभी भी बहुत खराब है. झारखंड के हजारीबाग जिले में बस मालिकों का भी यही हाल है जिनकी बसें स्कूल में चलती है. यहां पर लगभग 15 सौ से अधिक प्राइवेट स्कूल बस है. जो कोरोना संक्रमण के कारण करीब ढाई वर्षों से स्कूलों में बसें खड़ी है. इसके कारण कई बस मालिक परेशान हैं. वहीं, स्कूली बसों के नहीं चलने से पैरेंट्स भी काफी परेशान दिख रहे हैं. स्कूलों में खड़ी दर्जनों गाड़ियों का टेक्स फेल हो गया है. परिवहन से जारी परमिट, फिटनेस, चालक का लाइसेंस, गाड़ी का इंश्योरेंस व अन्य कागजात समय पर नहीं बना हैं. दूसरी ओर, कई स्कूल बसें बैंक एवं अन्य प्राइवेट संस्थान से फाइनेंस कराये हैं. समय पर किस्त जमा नहीं होने से बैंकों द्वारा बस मालिकों को नोटिस किया गया है. इसके कार बस मालिकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. हजारीबाग के चौपारण से तो खबर यह है कि इएमआई नहीं भर पाने के कारण बस मालिक डिप्रेशन के शिकार हो गये हैं.

ताजा आंकड़े के मुताबिक हजारीबाग के बरही डीएवी में 17 बस, सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा में 23 बस, मुनअम पब्लिक स्कूल में 10 बस, ज्ञानकुंज पब्लिक स्कूल में 3 बस, राज मेमोरियल ताजपुर में 2 बस, इंटर नेशनल स्कूल नगवां में 5 बस के आलाव और भी कई बस भाड़े में दी गयी है. पर बस नहीं चल पाने के कारण बस मालिक अपनी इएमआई नहीं चुका पा रहे हैं. इसके कारण उनके सामने जीने मरने की नौबत आ गयी है.चोपारण चतरा मोड़ के एक स्कूल बस मालिक सुनील सिंह बताते हैं कि उनके पास एक बस है जो उन्होंने एसबीआई चौपारण शाखा से फाइनेंस कराया है. बस बरही डीएवी स्कूल में भाड़े पर दी गयी है. लॉकडाउन के बाद किसी तरह किस्त जमा किया है. पर अब किस्त भरने में असमर्थ हैं. चौपारण सुरेखा भाई पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रीना पांडेय ने कहा कि स्कूल बंद होने के बाद विद्यार्थियों का फीस बंद है. एक-दो महीने तक किसी तरह बस भाड़ा बस संचालकों को दी गयी है. इसके बाद उन्हें बस भाड़ा नहीं मिली है. इस बात की जानकारी बस मालिकों को भी है कि स्कूल बंद से स्कूल फीस नहीं मिला है.

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