Teachers day Special: कहते हैं स्कूल एक मंदिर हैं….भीम महतो ने मंदिर को स्कूल बना दिया

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जो मुश्किल हालात में आगे बढ़ने की राह दिखाए… जो ऊंगली पकड़कर अंधेरे में फंसे इंसान को उजाले की ओर ले आए… जो वर्तमान को संवार कर भविष्य को बेहतर बनाए… वो होता है गुरू… शिक्षक दिवस के खास मौके पर हम मिलवाने जा रहे हैं एक ऐसे शिक्षक से जिन्होंने कोरोना काल में भी बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं दी. स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है, लेकिन कोरोना की वजह से जब स्कूलों के दरवाजे बंद हुए तो बोकारो के भीम महतो ने शिव मंदिर को ही स्कूल की तरह इस्तमेल किया. बोकारो के जुनोरी गांव के बीचोबीच बने शिव मंदिर वो बच्चों को पढ़ाते रहे और उनकी पढ़ाई रुकने नहीं दी. लॉकडाउन के दौरान जब बच्चे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे थे, तब गांव के टीचर भीम महतो ने इस मंदिर में लगे लाउड स्पीकर से बच्चों को बढ़ाया. लाउड स्पीकर से टीचर की आवाज गांव के कोने-कोने तक जाती थी… और बच्चे घर में बैठे-बैठे अपनी पढ़ाई करते थे… ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में डिजिटल सुविधाओं से दूर इस गांव में बच्चों ने भीम महतो की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी की.

अब जब देश और राज्य में कोरोना के आंकड़े कम हुए हैं तो बच्चे भीम महतो के पास पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं. लेकिन एक वक्त था जब कोरोना के डर के चलते गांव की गलियां सूनी हो गई थीं… लेकिन टीचर भीम महतो ने गरीब बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं दी. उन्होंने अपने पैसे खर्च कर दीवारों पर पेंटिंग करवाई और पोस्टर चिपकाए… ताकि उसे देखकर बच्चे सीखते रहें. लॉकडाउन खत्म होने के बाद बच्चों ने एक बार फिर स्कूलों का रुख किया है, लेकिन अभी भी भीम महतो उन्हें कोरोना से सावधानी और सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाते रहते हैं… बच्चों के भविष्य की खातिर भीम महतो ने जो कदम उठाया, उसके लिए पूरा गांव उनका आभार जताता है. बच्चों के जरिए वो गांव के बड़ों को भी सावधान करते रहते हैं. शिक्षक भीम महतो ने तमाम परेशानियों के बीच आगे बढ़ने का जो रास्ता दिखाया है, वो हर किसी के लिए मिसाल है.

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