बोकारो में एक गांव ऐसा भी… जहां आज भी ‘खाट’ पर है स्वास्थ्य व्यवस्था.. नहीं मिला इलाज तो बैरंग लौटे आदिवासी..

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बोकारो के गोमिया प्रखंड के सिंयारी पंचायत के संताली बहुल गांव असनापानी में सुविधाएं तक नहीं हैं। यहां ऐसा रोड तक नहीं है, जिससे यहां आना जाना आसान हो। गांव वाले आज भी बुनियादी सुविधाओं के मोहताज हैं। दिल दहला देने वाली एक तस्वीर आई है कि यहां लोग कैसे स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। एक बुज़ुर्ग महिला को खाट पर लादकर ले जाया गया, लेकिन महामारी के दौर की असंवेदनशीलता के चलते अस्पताल पहुंचना तब भी मुमकिन नहीं हो सका।

एक बुजुर्ग महिला बंधनी देवी को इलाज के लिए खाट पर लादकर पांच किलोमीटर दूर दनिया ले गये, ताकि वहां से इलाज के लिए रामगढ़ ले जाया जा सके, कोरोना के डर से किसी ने सहयोग नहीं किया, तो ग्रामीण मरीज वृद्धा को वापस गांव ले गये. अब जड़ी-बूटी से इलाज किया जा रहा है। गांव वालों का कहना है जब किसी महिला को प्रसव पीड़ा होती है, तब भी इसी प्रकार महिलाओं को खाट पर लादकर उबड़ खाबड़ पगडंडियों और जंगली रास्तों से ले जाना पड़ता है। गोमिया प्रखंड के सुदूर उग्रवाद प्रभावित गांवों में जहां पहुंच मार्ग तक नहीं हैं, वहीं अब भी लोग लालटेन और ढिबरी से घरों में उजाला करते हैं। बता दें कि असनापानी गांव में 15 आवास संताली परिवार के हैं, जो पहाड़ी में हैं। स्कूल तो छोड़िए, यहां के ग्रामीण अपने बच्चों के लिए एक आंगनबाड़ी केन्द्र की मांग लंबे अरसे से कर रहे हैं। फिलहाल उनके बच्चे तीन किलोमीटर दूर बिरहोर डेरा गांव के स्कूल में जाते हैं।

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