चतरा में अंधविश्वास में फंसे ग्रामीण… मृत महिला के शव में जान फूकने का चलता रहा खेल …

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चतरा के प्रतापपुर प्रखण्ड में सिद्दकी पंचायत के मजगामा गांव में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे आप भी जानकर हैरान हो जाएंगे । बिस्तर में मृत महिला का शव को जिंदा करने का खेल पूरा दिन चलता रहा और ग्रामीण मृतक महिला का जिन्दा होने के आश में पूरा दिन इंतजार करते रहे । यह अंधविश्वास का खेल अशिक्षित गांव में ईसा मसीह के प्रचारक महिलाओं के द्वारा प्रार्थना और झाड़ फूंक करने का खेल घण्टो चलता रहा और उनके द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि बेजान शरीर में जान आ जायेगी । यह अंधविश्वास का खेल धीरे धीरे आग की तरह मजगामा गांव के अलावे पूरे सिद्दकी पंचायत में फैल गई।

दरअसल प्रतापपुर प्रखण्ड में इन दिनों ईसा मसीह के प्रचारक सुदूरवर्ती गांव जहाँ अशिक्षा और नक्सलवाद से ग्रसित गांव है। उन इलाकों में धर्मांतरण का खेल जारी है इस क्रम में सिद्दकी पंचायत अंतर्गत मजगामा गांव की हैं महिला की मौत हो जाती है मृतक महिला आठ माह कि गर्भवती थी और उसकी तबियत आचनक बिगड़ जाने से ईलाज कराने के लिए ले जाने के क्रम में उसकी मौत रास्ते में हो गई । जिसके बाद उसके परिजन उस मृत महिला का शव लेकर अपने घर लौटे ही थे की चर्च से जुड़े अंधविश्वास की सात से आठ दीदियां आई और उसके घर वालो को बताया कि मैं आपकी बहु को जिंदा कर सकती हूं।जिसके बाद मृत महिला के परिजनो को पता नहीं क्या सूझी की वो चर्च से जुड़े अंधविश्वास की दीदियों पर भरोसा करके उसके परिजन प्रार्थना व झाड़ फूंक कराने को लेकर तैयार हो गए। उसके पश्चात उस मृत महिला के शव को अकेले कमरे में बंद कर अंधविश्वास का खेल शुरू किया गया और चर्च से जुड़ी महिलाएं प्रार्थना और झाड़ फूंक शुरू कर दी। समय बीतते चला गया जिसके बाद उसके परिजन ने झाड़ फूंक कर रही दीदियों से सवाल करने लगे की कैसी है अभी हमारी बहु तो उसके बाद चर्च से जुड़े दीदियों ने झूठे आश्वासन देते रहे की आपकी बहु का सांस चलने लगा है, तो कभी वो लोग बताते की पानी पी रही है तो कभी बोलते की जिंदा हो गई है। लेकिन न ही वो बेजान शरीर में कोई हरकत आया और न ही वो दुबारा बिस्तर से उठ सकी। लेकिन उसके परिजन इस आस में बैठे रहे की हमारी बहु जिंदा हो उठेगी, इस उम्मीद में सुबह से शाम हो गई लेकिन न ही शरीर में जान लौटी और न ही ग्रामीणों की अंधी आस्था कोई रंग लाई। पूरा दिन बीत जाने के बाद ग्रामीणों ने ग्रामीण चिकित्सक को बुलाया और उस मृत महिला का जांच करवाया जिसके बाद डॉक्टर ने जांच किया तो उन्होंने ने बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। जिसके बाद झाड़ फूंक करने वाली दीदियां वहा से किसी तरह निकलकर भागी। इन क्षेत्रों में अंधविश्वास की जंजीरे आज भी जकड़ कर रखी है। और इसी का फायदा उठाकर भोले -भाले ग्रामीण को धर्मांतरण कराने में सफल हो जाती है ।

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