पूर्वी सिंघभूमि में मोटे अनाज की खेती पर संकट, निर्धारित लक्ष्य से बहुत कम हो रहा उत्पादन

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जमशेदपुर । पूर्वी सिंहभूम जिले में नकदी फसलों की ओर किसानों का रूझान, ज्यादा कृषि विभाग द्वारा दिए गए लक्ष्य के अनुरूप अब तक दलहन, तेलहन व मोटे अनाज की फसलों में पिछ़ड़ रहा है। तेलहन में जहां अब तक लक्ष्य का 13 प्रतिशत, दलहन में लक्ष्य का 49 प्रतिशत तथा मोटे अनाज में मात्र 13 प्रतिशत ही पैदावार हो रही।

जिला कृषि विभाग के अधिकारियों से बात करने पर बताया कि मोटी फसल हो या दलहन, तेलहन किसानों को हमेशा प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रारंपरिक खेतों की ओर दुबारा किसान लौट सके। जिला कृषि विभाग के आंकड़ें को देखें तो 2021 में अब तक किसी ने नहीं लगाया सोयाबीन, बाजरा व मड़ुआ की फसल। इस संबंध में जिले के प्रगतिशील किसान पटमदा निवासी यदुनाथ गोराई कहते हैं कि चूंकि मोटे अनाज की खेती किसान इसलिए नहीं कर पाते कि उसमें आउटपुट नहीं है। जिले में नकदी फसलों की ओर किसानों का रूझान है, जैसे सब्जी व फल की खेती।

मोटे अनाज की खेती पर संकट के बादल छा गए हैं। इस संबंध में किसान रमेश किस्कू कहते हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण है सरकार का सही दिशा में किसानों को जानकारी नहीं देना। मोटे अनाजों से लाभ ही लाभ है, लेकिन सरकार इनकी सरकारी खरीद, भंडारण और वितरण का कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान मोटे अनाज की खेती से कतरा रहे हैं। यह भी एक कारण है कि किसान इन फसलों की खेती मजबूरी में ही करते हैं।

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