छा गई झारखंड की बेटी… बनीं विश्व की नंबर 1 तीरंदाज; एक दिन में 3 गोल्ड मेडल… रिक्शा चलाते थे पिता

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रविवार को झारखंड की बेटी दीपिका कुमारी ने देश का सीना गर्व से ऊंचा कर दिया। विश्व तीरंदाजी में उन्हें एक दिन में तीन स्वर्ण पदक मिले। रविवार को दीपिका ने सबसे पहले में झारखंड की ही दो और बेटी कोमालिका बारी और अंकिता भगत के साथ पहला गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद अपने पति अतनु दास के साथ मिक्सड डबल में स्वर्ण पदक हासिल किया। फिर उन्होंने सिंगल कॉम्पीटीशन (एकल प्रतिस्पर्धा) में गोल्ड मेडलल जीता।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में विश्व तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। रविवार को दीपिका ने एक दिन में देश के नाम 3 मेडल जीते। विश्व तीरंदाजी में कामयाबी हासिल करने के बाद अब दीपिका का लक्ष्य होने वाला ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करना है। दीपिका कि ये कामयाबी लोगों के लिए मिसाल है। ऐसा इसलिए क्योंकि 26 साल की दीपिका के पिता परिवार को पालने के लिए ऑटो रिक्शा चलाते थे। उनकी मां रांची मेडिकल कॉलेज में नर्स थीं। उनकी मां चाहती थीं कि दीपिका एक डॉक्टर बने, लेकिन उन्होंने लिए तो पहले से ही लक्ष्य तय कर रखा था। 11 साल की उम्र में नो टाटा आर्चरी एकेडमी ज्वाइन करना चाहती थीं। एकेडमी में दाखिला मिल सके इसके लिए दीपिका घर में आम पर निशाना लगाकर प्रैक्टिस करती थी।

वो इस एकेडमी में किसी तरह भी दाखिला लेना चाहती थीं। उन्होंने टाटा आर्चरी एकेडमी से कहा था कि अगर 3 महीने में वो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाईं तो उसे निकाल देना। हालांकि उस साल उनका टाटा आर्चरी एकेडमी में दाखिला नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने अर्जुन आर्चरी एकेडमी में दाखिला लिया। उन्होंने वहां इतना अच्छा प्रदर्शन किया कि अगले साल ही दीपिका को टाटा आर्चरी एकेडमी में दाखिला मिल गया। 2009 में अमेरिका में हुए विश्व युवा आर्चरी प्रतियोगिता में दीपिका ने 15 साल की उम्र में गोल्ड मेडल जीता था। दो साल पहले दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में दो गोल्ड में हासिल किए थे।

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