झारखण्ड पुलिस में जूनियर अफसरों पर तो गिरती है कार्यवाही की गाज लेकिन बड़े अफसरों के मामले बंद हो जाते है ठंढे बस्ते में….

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धनबाद: झारखंड पुलिस में एएसआइ या एसआइ अगर क‍िसी अपराध‍िक मामले या भष्‍ट्राचार में शाम‍िल हो तो तुरंत उसे अपराध की सजा म‍िल जाती है । वहीं जब बात आती है बड़े अफसरों की तो अपराध का दंड देर से भी नहीं भुगतना पड़ता है। राज्य में ऐसे कई मामले देखे गए है जिसमें यह बात साफ – साफ नजर आती है।

रिश्वत लेते रेंज हाथ पकड़े गए ASI

धनबाद जिले के निरसा थाना के तहत कालूबथान ओपी के एएसआई हरि प्रकाश मिश्रा को एसीबी ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। हरि प्रकाश मिश्रा दहेज उत्पीड़न के मामले में अभियुक्त को गिरफ्तार नहीं करने के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत ले रहे थे। इस मामले में इन्हें सस्पेंड भी किया गया था। आरोपित को जेल भेजा गया था।

जज हत्याकांड में थाना प्रभारी निलंबित

28 जुलाई को न्यायाधीश उत्तम आनंद को टक्कर मारने वाले ऑटो की चोरी की प्राथमीकि दर्ज करने में देरी के लिए पाथरडीह थाने के प्रभारी उमेश मांझी को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा इसी मामले में जज को धक्का लगाने वाला वीडियो वायरल होने के चलते धनबाद थाना के दारोगा आदर्श कुमार को सस्पेंड कर दिया गया था।

अवैध वसूली मामले में दरोगा ससपेंड

वर्ष 2016 में जीटी रोड पर अवैध वसूली के मामलों को लेकर चालक को गोली मार देने का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले में तात्कालीन बोकारो रेंज डीआइजी प्रभात कुमार ने हरिहरपुर ताने के दारोगा संतोष रजक को निलंबित कर दिया था। सीआइडी ने जब इस मामले की जांच की तो इस मामले में इंस्पेक्टर डीएन मिश्रा व डीएसपी मजरुल होदा को भी दोषी पाया था। मगर उन पर कार्रवाई नहीं की गयी।

गैंगेस्टर के फरार होने के केस में दरोगा पर चार्जशीट दायर

हजारीबाग जिला के बड़कागांव थाना से गैंगस्टर अमन साव फरार हो गया था। मामले में दारोगा मुकेश कुमार पर चार्जशीट दायर की गयी थी। इस मामले में दारोगा मुकेश कुमार ने पुछताछ में बताया था कि तात्कालीन डीएसपी अनील कुमार सिंह के कहने पर उसने अमन साव को हाजत की जगह गेस्ट हाउस में रखा था। बावजूद इसके सीआइडी ने सिर्फ मुकेश कुमार पर ही चार्जशीट की थी।

एसपी पर नहीं हुई कोई विभागीय कार्यवाही

धनबाद के चर्चित गांजा तस्करी मामले में जिस तरह चिंरजीत घोष को फंसाया गया था, ठीक उसी तरह गोड्डा के एक गांजा तस्करी में चिंरजीत का नाम सामने आया था। सीआइडी की रिपोर्ट में आया था कि त्ताकालीन एसपी शैलेंद्र वर्णवाल के कहने पर आरोपित ने स्वीकारोक्ति में चिंरजीत घोष का नाम लिया था, मगर यह मामला भी पूरी तरह फर्जी था। बावजूद इसके एसपी के पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई।

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