कोरोना योद्धाओं की दर्द भरी दास्तां…. 3 महीन से वेतन पर आफत…धनबाद में स्वास्थ्य मंत्री का घेराव

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DHANBAD: झारखंड सरकार ने कोरोना काल में सरकारी चिकित्सालयों मे स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रूप संचालित करने के लिए अनुबंध पर कर्मचारियों से काम लिया। लेकिन सरकार ने पूरे राज्य के कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ मजाक किया है। जब कोरोना की दूसरी लहर जोरों पर थी तो सरकार अनुबंध पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों की तारीफ करते नहीं थकती थी। लेकिन अब कोरोना काल में जान पर खेलकर लोगों की जान बचाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है. झारखंड सरकार उनको पिछले 3 महीने से तनख्वाह तक मुहैया नहीं करा पाई है. एक महीने का अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। प्रोत्साहन राशि तो दूर हाल यह है कि चार महीने से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। कोरोना की लहर थमी तो सरकार स्वास्थ्यकर्मियों को भूल गई। इससे स्वास्थ्यकर्मी काफी आहत हैं। रविवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता धनबाद पहुंचे तो स्वास्थ्यकर्मियों ने उनका घेराव किया। इसके बाद मंत्री ने पूरे मामले को धनबाद के उपायुक्त संदीप कुमार के देखने को निर्देश देकर बच निकले। राज्य सरकार कोरोना संक्रमण काल में सेवा प्रदान कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना योद्धा कह कर सम्मानित किया। लेकिन हकीकत है कि इन कोरोना योद्धाओं को सम्मान तो दूर, वेतन और नौकरी बचाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वेतन की मांग को लेकर रविवार को भी एसएनएमएमसीएच के कैथ लैब कोविड-19 के 41 नर्स और स्वास्थ्य कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। इधर, धनबाद दौरे पर आए स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का स्वास्थ्य कर्मियों ने घेराव किया। इसके बाद मंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन रेस हो गया है।

उपायुक्त संदीप सिंह ने इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरुण कुमार वर्णवाल, सिविल सर्जन डॉ श्याम किशोर कांत समेत अन्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को तलब किया है। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों के वेतन और प्रोत्साहन राशि की चर्चा कमेटी के माध्यम से की है. अस्पताल के आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों ने अस्पताल प्रबंधन और सरकार से काफी नाराज है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि कर्मियों के भविष्य के साथ मजाक किया जा रहा है। कोविड सेंटर सभी कर्मचारी रात-दिन एक करके दूसरी लहर से मरीजों की जान बचाई है। लेकिन अब सरकार और प्रशासन ऐसा रवैया करेगा, यह कभी सोचा नहीं था। लॉकडाउन में कर्मचारी बड़ी मशक्कत से अस्पताल आ पाते थे, बिना छुट्टी लिए लगातार 4 महीने तक काम किया, अब वेतन के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है। झारखंड सरकार में कोरोना काल में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को 1 महीने का अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। इसे लेकर जिले में बड़ी गड़बड़ी हुई है। कार्यालय में काम करने वाले बाबू और अन्य कर्मियों को 1 महीने का अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दिया गया। लेकिन कोविड आईसीयू में काम करने वाले अनुबंध और आउटसोर्सिंग कर्मियों को प्रोत्साहन राशि तो दूर वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। यही हाल सदर अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों का है। यहां भी प्रोत्साहन राशि तो दूर 4 महीने का वेतन भी नहीं मिला है। वेतन को लेकर एजेंसी को निर्देशित किया गया है। जिला प्रशासन के साथ बैठक हुई है। जहां समस्याएं हैं उसे दूर की जाएगी।

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