ट्विटर के ‘डर’ पर सरकार का पलटवार… कानून से ऊपर कोई नहीं… जानिए क्या है पूरा विवाद

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ट्विटर और सरकार के बीच शुरू हुआ विवाद और तू-तू मैं मैं में बदल गया है। कल ट्विटर ने अपने दफ़्तर में दिल्ली पुलिस की छानबीन को लेकर एतराज़ जताते हुए अपने कर्मचारियों की सुरक्षा पर चिंता जताई। वहीं ट्विटर के इस बयान के बाद दिल्ली पुलिस से लेकर केंद्र सरकार तक हमलावर हो गई। केंद्र ने साफ़ कर दिया कि ट्विटर भारत को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी का पाठ नहीं पढ़ाए। भारत में रहकर भारत के क़ानून के हिसाब से चलना होगा।

केंद्र सरकार की ओर से कड़े शब्दों में ट्विटर के बयान को लेकर जवाब दिया गया है. सरकार ने कहा है कि ट्विटर को आईटी मंत्रालय की ओर से बनाए गए नियमों का पालन करना होगा। ट्विटर को इधर-उधर की बातें करनी बंद करनी होगी और भारत के नियमों को मानना होगा. कानून और नीतियां बनाना एक देश का विशेष अधिकार है और ट्विटर सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. इसलिए भारत की कानूनी नीतियां क्या होनी चाहिए, इसमें उसका दखल नहीं होना चाहिए। ट्विटर ने एक बयान जारी कर कहा था कि वो उन गाइडलाइंस का पालन नहीं करेगा जो भारत सरकार ने आपराधिक गतिविधियां रोकने के लिए तैयार की हैं। सरकार ने ट्विटर के आरोपों को झूठा और आधारहीन बताते हुए इसे भारत को बदनाम करने की साजिश बताया है। क्या है पूरा विवाद –

18 मई – कांग्रेस के कथित टूलकिट को संबित पात्रा ने ट्वीट किया

20 मई – ट्विटर ने संबित पात्रा के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ बताया

24 मई – दिल्ली पुलिस की टीम छानबीन के लिए ट्विटर के दफ्तर पहुंची

26 मई – सोशल मीडिया के लिए सरकार की नई गाइडलाइन को चुनौती

27 मई – ट्विटर ने बयान जारी कर कर्मचारियों की सुरक्षा पर चिंता जताई

27 मई – सरकार ने ट्विटर के आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया

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