जमशेदपुर में मुक्ति हुई मुश्किल… 22 घंटे तक जल रहीं चिताएं… लकड़ियों की कमी…

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कोरोना संक्रमण के वजह से हर दिन मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। वहीं जमशेदपुर में स्थिति ऐसी है कि श्मशान में लगातार शव जलाए जा रहे हैं। हर दिन 15 से 20 हजार किलो लकड़ी की खपत हो रही है। लगातार हो रही मौत और फर्नेश की सीमित क्षमता के कारण लकड़ियों की कमी हो रही है। बिजली पर शव जलाने का शुल्क 1500 रुपए है। वहीं, लकड़ी से शव जलाने का खर्च तीन हजार रुपए आता है।

आपको बता दें कि जमशेदपुर में कोरोना संक्रमण से मरने वालों का अंतिम संस्कार सुवर्णरेखा घाट में हो रहा है। सुबह 5 बजे से शव जलना शुरू होता है और देर रात करीब दो बजे तक शव जलता है। पार्वती घाट में दो फर्नेस है जिसमें शव को जलाया जाता है। पिछले कुछ दिनों से शव की संख्या अचानक बढ़ने के कारण लकड़ी पर शव को जलाया जा रहा है। घाट के कर्मचारी हालात को देखते हुए पहले से चिता तैयार करके रखते हैं जिससे अंतिम संस्कार में देर नहीं हो। बताया जा रहा है कि पहले दिन भर में 8 से 10 शव जलाए जाते थे। लेकिन,अब 50 से ज्यादा शव जलाए जा रहे हैं। इसमें 30 से 40 शव लकड़ी पर जलाए जा रहे हैं जबकि 10 से 15 शव फर्नेस पर जलाए जा रहे हैं। एक शव को जलाने के लिए करीब चार क्विंटल लकड़ी की जरूरत पड़ती है। वर्तमान समय में लोगों को दिक्कत नहीं हो इसके चलते लकड़ी की एक निश्चित दर तय की गई है। लकड़ी की चाहे जितनी खपत हो तीन हजार रुपए ही लिए जाते हैं। वहीं घाट के कर्मचारियों का कहना है कि श्मशान घाट में लकड़ी का गोदाम खाली हो चुका है।