बोकारो का वो गांव जहां नहीं मनाई जीती है होली… रंग खेलने से हो जाती है बड़ी अनहोनी

Share

बोकारो के कसमार ब्लॉक में पड़ता है दुर्गापुर पंचायत। इस पंचायत में लोगों की करीब 9 हजार आबादी रहती है। लेकिन मजाल है कि इस पंचायत के लोग होली के रंग को छू भी लें। इस पंचायत में रहने वाला कोई भी इंसान होली नहीं खेलता है। ना ही रंग का कोई कार्यक्रम होता है। दुर्गापुर में आजादी से पहले करीब 150 सालों से होली नहीं खेली जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गांव के लोगों का मानना है कि गांव में जब भी होली खेली खेली गई, कोई बड़ी घटना घट जाती है। गांव के लोगों का दावा है कि होली खलने से कई बार इंसानों की मौत हो गई। कई बार होली खेलने के बाद गांव के पालतू जानवर मर गए।

इलाके के लोगों ने बताया कि इसके पीछे एक लंबी कहानी है। लोगों ने बताया कि रामगढ़  के राजा ने अपने सैनिकों से अपनी रानी के लिए झालदा से साड़ी मंगवाई थी। सैनिक दुर्गापुर के रास्ते से गुजर रहे थे। सैनिकों पर दुर्गापुर के राजा दुर्गा की नजर पड़ी। उन्होंने सैनिकों के हाथ में साड़ी देखी। साड़ी देखने के लिए खोलने का आदेश दिया। दोबारा सैनिक साड़ी को समेट नहीं सके। इससे नाराज रामगढ़ के राजा ने दुर्गापुर पर चढ़ाई कर दी। युद्ध में दुर्गापुर के  राज की मौत हो गई। जिस दिन दुर्गापुर के राजा दुर्गा प्रसाद की मौत हुई दिन दिन होली थी। इसलिए तब से दुर्गापुर में कभी होली नहीं केली गई। गांव के लोग दुर्गापुर के राजा की बाबा बड़ाव के नाम से पूजा करते हैं। गांव के लोगों ने बताया कि बाबा बड़ाव को रंग और गुलाल पसंद नहीं है।

Facebook Comments Box