RTI से बड़ा खुलासा… सीएम हेमंत सोरेन का सोशल मीडिया पर 1 दिन का 1.25 लाख महीने का 36 लाख का खर्च…

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन  को लेकर आरटीआई से बड़ा खुलासा हुआ है. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से मिले जबाव में ये बताया गया कि सीएम हेमंत सोरेन सोशल मीडिया पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं. इसके लिए एक निजी कंपनी को हायर किया गया है. यह कंपनी साल 2021 से सीएम के ट्विटर, फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया पेज हैंडल कर रही है. कंपनी से इसके लिए 3 साल का कांट्रैक्ट साइन किया गया है. इसके लिए 13 करोड़ 14 लाख रुपये कंपनी को भुगतान किया जाएगा. इनमें से 65 लाख रुपये कंपनी को काम शुरू करने से पहले ही भुगतान कर दिया गया है.

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सीएम हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया पेज को हैंडल करने के लिए पीडीएजी कंसल्टेंट एलएलपी कंपनी को एक दिन का सवा लाख और महीने का 36 लाख भुगतान किया जा रहा है. रांची के सामलोंग के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो ने आरटीआई के तहत झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से सीएम हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया पेज संचालन में होने वाले खर्च का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में विभाग ने 3 साल में 13 करोड़ 14 लाख 65 हजार खर्च की जानकारी दी है. रांची के सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो ने आरटीआई के जरिये सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से सीएम हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया पेज संचालन में होने वाले खर्च का ब्योरा मांगा थारांची के सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो ने आरटीआई के जरिये सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से सीएम हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया पेज संचालन में होने वाले खर्च का ब्योरा मांगा था सुनील कुमार ने बताया कि सीएम हेमंत सोरेन रामगढ़ जिले के जिस नेमरा पंचायत से तालुक्क रखते हैं, वहां के मात्र 14 परिवारों की मासिक आय 10 हजार है. 46 परिवार ऐसे हैं जिनकी मासिक आय 5 हजार से अधिक है. उस माटी का बेटा सोशल मीडिया पर रोज सवा लाख खर्च कर रहा है. सीएम हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया पेज को हैंडल करने के लिए निजी कंपनी को 13 करोड़ में 3 साल के लिए हायर किया गया है. सीएम हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया पेज को हैंडल करने के लिए निजी कंपनी को 13 करोड़ में 3 साल के लिए हायर किया गया है. उन्होंने कहा कि झारखंड को लेकर नीति आयोग की ताजा  रिपोर्ट में राज्य के 42 प्रतिशत लोग गरीब है. सीएम हेमंत सोरेन राज्य के जिस पाकूड़ और साहेबगंज जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं वहां की 60 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे है. ऐसे में सोशल मीडिया पर महीने का 36 लाख खर्च करना कहां तक जायज है.

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