रिम्‍स के डाक्‍टरों की जासूसी करेंगे जासूस… जानिये क्या है वजह

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रांची के रिम्स अस्‍पताल में अब रिम्स के डॉक्टरों की अब गुप्तचर एजेंसी के जरिए जासूसी कराई जाएगी। वे ऐसे डाक्टरों की जासूसी करेंगे जो रिम्स से नन प्रैक्टिस अलाउंस एनपीए लेकर निजी प्रैक्टिस करते है। वे ऐसे डाक्टरों की जानकारी जुटाकर रिम्स और विभाग को सौंपेंगे। इसके बाद साक्ष्य के आधार पर उन पर कार्रवाई की जा सकेगी। सोमवार को रिम्स की गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह फैसला लिया गया।

यह निर्णय कोरोना के बाद सोमवार को रिम्स शासी परिषद Governing Body की 52वीं बैठक में लिया गया। इस बैठक में कुल 20 एजेंडे पर सहमति बनी। इसके अलावा जो सबसे अहम फैसला लिया गया है, उसके अनुसार अब रिम्स के रिम्स जीबी की बैठक में रांची यूनिवर्सिटी के नियम के आधार पर सभी विभागों में एचओडी रोटेशनल आधार पर होंगे। एक एचओडी की अवधि दो साल की होगी। हालांकि रांची यूनिवर्सिटी में एचओडी का रोटेशन दो साल की अवधि का ही होता है। रिम्स प्रबंधन इस अवधि को तीन साल करने पर विचार कर रहा है।

रिम्स को बेहतर बनाने की दिशा में 1300 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया गया है। इसके तहत रिम्स में 40 हजार वर्गफीट पर पांच तल्ला तक ओपीडी का नया भवन बनाया जाएगा। इसके अलावा सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का विस्तार कर 700 बेड तक बढ़ाया जाएगा। इसमें मातृ-शिशु के लिए 300 बेड लगाए जाएंगे। साथ ही क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के निर्माण के लिए री-टेंडर निकाला जाएगा। अभी तक नेत्र संस्थान के भवन निर्माण में 54.17 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

रिम्स में 10 वर्ष से अधिक समय तक काम कर चुके चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को नियमानुसार समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री ने बताया कि रिम्स में ऐसे करीब 75 कर्मी हैं, जिन्हें इस फैसले का लाभ मिलेगा। इस बार की बैठक में किसी भी नियुक्ति को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है। लेकिन विभिन्न बहालियों को लेकर बैठक में चर्चा जरूर की गई है। हालांकि सीटीवीएस विभाग के लिए सह प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए तैयार मेधा सूची के आधार पर रिजल्ट जल्द प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है।

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