रांची में एक निर्दयी बेटे ने मां का शव देख बंद कर लिया दरवाजा… बेटियों ने दी मां को अंतिम विदाई…

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इस कोरोना काल में रांची में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एकलौते बेटे ने अपने मां की मौत के बाद उनके शव को घर के आंगन तक नहीं आने दिया। यहां तक लोगों को रोकने के लिए घर में ताला तक लगा दिया। जब बेटिया गुहार लगाने लगी तो वो हाथापायी पर उतर आया। जब अपनी मां की आखरी विदाई बेटियां करने लगी तो उस निर्दयी बेटे ने हिदायत दी कि अंतिम संस्कार भी दूसरे गांव में ले जाकर करो।

बताया जा रहा है कि सांझो देवी की मौत सीसीएल के गांधीनगर अस्पताल में हो गयी थी। उनकी तबीयत बिगड़ने पर बेटी रीना देवी और दीपिका कच्छप अस्पताल में भर्ती करायी और सांझो देवी की सेवा कर रही थी। 13 दिनों तक मां का इलाज चला लेकिन एक दिन भी बेटे लालू उरांव अस्पताल नहीं गया। बेटे को शक था कि उसकी मां को कोरोना हो गया है। इस कारण बेटा अस्पताल नहीं जा रहा था। मां की मौत के बाद भी लालू उरांव मां का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। लालू के इस रैवये से आहत बहनें बार बार कहती रही कि मां को कोरोना नहीं था। उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। लेकिन भाई और उसकी पत्नी पर कोई असर नही पड़ा। अंत में दोनों बहनों ने ही मां के शव को कंधा दिया और गांव से एक किलोमीटर दूर मसना स्थल में अपनी मां को दफन कर अंतिम रस्म पूरी की। बता दें लालु उरांव के पिता सीसीएल में नौकरी करते थे। सेवाकाल के दौरान ही वर्ष 2009 में उनकी मृत्यु हो गयी। इसके बाद अनुकंपा के आधार पर पहले उनकी पत्नी सांझो देवी को नौकरी का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन मां ने बेटे को नौकरी दे दी। वर्ष 2011 में बेटे लालू उरांव को सीसील में नौकरी मिली। और वहीं लालू की मां मजदूरी कर अपना गुजारा करती थी। दोनों बहनों की शादी हो गयी है और वह ससुराल में रहती हैं।

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