उषा देवी की मौत पर झारखंड हाई कोर्ट खफा… अस्पताल सब्जी की तरह प्लास्टिक बैग में लौटाते हैं लाश …

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झारखंड हाई कोर्ट ने ब्लैक फंगस से पीड़ित महिला उषा देवी की मौत के मामले पर नाराजगी जताई है। प्रथम द्रष्टया रिम्स की लापरवाही मानते हुए निदेशक को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि हर जान की कीमत होती है, उसकी अनदेखी की गई. अदालत ने राज्य सरकार और रिम्स निदेशक से इस पर विस्तृत और बिंदुवार जवाब पेश करने को कहा है.

कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डॉक्टर मरीजों को सब्जियों की तरह देख रहे हैं। मरीज के परिजन अस्पताल में अपने मरीज के ठीक होने का इंतजार करते हैं, लेकिन अस्पताल प्लास्टिक बैग में लपेटकर उनके परिजन का शव दे रहे हैं। अस्पताल पैसा बनाने की मशीन बन चुके हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने रिम्स निदेशक से पूछा कि ब्लैक फंगस की बीमारी से इलाजरत जिस महिला के मामले में कोर्ट ने निर्देश दिया था उसका क्या हुआ? रिम्स निदेशक ने कोर्ट को बताया कि सर्जरी के बाद उस महिला की मृत्यु हो गई। जिसपर अदालत ने पूछा कि वह महिला कब भर्ती हुई थी? रिम्स निदेशक ने बताया कि लगभग एक माह पूर्व वह महिला रिम्स आयी थी। रिम्स निदेशक का जवाब सुनकर अदालत ने कहा कि सर्जरी में इतनी देर क्यों हुई? कोर्ट ने कहा कि कोरोना में डॉक्टरों ने काफी अच्छा काम किया, लेकिन इस मामले में मरीज की अनदेखी की गई, हर जान कीमती होती है। हम इस मामले की जांच चाहते हैं। सच क्या है यह पता कीजिए। कोर्ट ने रिम्स निदेशक से आंतरिक जांच रिपोर्ट एफिडेविट के माध्यम से मांगी। बता दें ब्लैक फंगस की मरीज उषा देवी को इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था। कई दिन तक जब मरीज का ट्रीटमेंट नहीं शुरू हुआ तो मरीज के परिजनों ने उसके लिए इच्छामृत्यु की माग की। उषा देवी के परिजनों ने रिम्स परिसर में धरना भी दिया था। इस मामले पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया और उषा देवी का समुचित इलाज करने के निर्देश दिए। जिसके बाद रिम्स में उसका इलाज किया गया. रिम्स प्रबंधन ने एक टीम गठित कर सर्जरी भी कराई। हालांकि मरीज को नहीं बचाया जा सका और उषा देवी की मौत हो गई। इस पर उषा देवी के बेटे ने रिम्स प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसी मामले में सुनवाई हुई।

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