रांची में पुलिस प्रशासन की बड़ी लापरवाही… मृत पुलिस की वाहन चेकिंग में लगी ड्यूटी.. नहीं पहुचनें पर सजा सुना दी…

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रांची में पुलिस प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आयी है। जिस पुलिसकर्मी की मौत दो महीने पहले हो चुकी है, उसकी ड्यूटी वाहन चेकिंग अभियान में लगा दी गई है। हद तो तब हो गई कि जब मृत पुलिस वाले को सजा भी दे दी गई और उस पर रांची के सीनियर एसपी ने अपना हस्ताक्षर भी कर दिया।

बताया जा रहा है कि रांची जिला बल में पदस्थ जवान बंदे उरांव की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी ड्यूटी वाहन चेकिंग अभियान के दौरान बूटी मोड़ पर लगा दी गई। लापरवाही की हद तो देखिए जब मृत बंदे उरांव ड्यूटी पर नहीं पहुंचे तो उनको एक दिन के लिए निंदन की सजा भी दे दी गई। इस पूरे मामले में सबसे हैरत की बात तो यह है कि मृत पुलिसकर्मी को निंदन की सजा दिलाने वाले पेपर पर रांची के सीनियर एसपी के हस्ताक्षर भी करवाए जाते हैं। इस मामले से यह साफ तौर पर पता चलता है कि बड़े अधिकारी बिना फाइल पढ़ें उस पर हस्ताक्षर कर देते हैं जो भविष्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।  हैरत तो यह है कि पुलिस लाइन में मौजूद सार्जेंट मेजर को यह पता ही नहीं है कि उनका कौन सा जवान इस दुनिया में नहीं है या फिर कौन छुट्टी पर है। बंदे उरांव तो इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन दो और जवान छुट्टी लेकर घर गए थे इसके बावजूद उनकी ड्यूटी लगाई गई और ड्यूटी न करने पर निंदन की सजा दी गई। वहीं, यह मामला सामने आने के बाद झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन के अधिकारियों ने पूरे मामले को लेकर अपना विरोध जताया है। अधिकारियों का आरोप है कि पुलिस लाइन में ड्यूटी को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। ना ही फाइलों को ध्यान से देखा जाता है। अगर कोई भी उनका साथी असमय मृत्यु का शिकार हो जाता है तो एक सप्ताह के बाद ही रजिस्टर से उसका नाम हटा दिया जाता है, लेकिन बंदे उरांव के मामले में ऐसा नहीं हुआ और मृत्यु के 2 महीने बाद भी उनकी ड्यूटी लगा दी गई।

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