फादर स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी का विरोध करने वाले आज उनके निधन पर हैं खामोश

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आ‍दिवासी और वंचितों के अधिकार के लिए मुखर रहने वाले और भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में आरोपी स्‍टेन स्‍वामी का सोमवार को निधन हो गया। मुंबई के होली फैमिली हॉस्पिटल में उन्होंने आखिरी सांस ली। स्‍टेन स्‍वामी की जमानत याचिका पर सोमवार को ही सुनवाई होनी थी। उनके निधन पर बहुत सारे लोगों ने शोक जताया है। फादर स्टेन स्वामी के निधन पर कुछ भी नहीं बोलने पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी पर सवाल खड़ा किया है।

जेएमएम ने कहा, ‘यह शर्मनाक बात है’, कि आदिवासियों के हक के लिए आजीवन संघर्षशील रहे फादर स्टेन स्वामी की मृत्यु पर बाबूलाल मरांडी के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला। जब वे झारखंड विकास मोर्चा (JVM) के सुप्रीमो थे, तब उन्होंने हमेशा फादर स्वामी पर हुए मुकदमों और गिरफ्तारी का विरोध किया था। ऐसा कर बाबूलाल एक बार फिर सत्ता के लालच में अपने जमीर, अपनी बोल और अपनी सोच को तिलांजलि देते हुए मौन धारण कर लिए हैं। JMM का कहना है कि जो इंसान आदिवासियों को नहीं हुआ, अपनी सोच का नहीं हुआ, कपड़ों की तरह जो हमेशा अपनी विचारधारा बदले, वह झारखंडियों का कैसे होगा।बता दें कि 3 अगस्त 2018 को तत्कालीन प्रदेश भाजपा सरकार द्वारा फादर स्टेन समेत 20 सामाजिक कार्यकर्त्ताओं पर देशद्रोह का मुकदमा किया गया था, तब इसके खिलाफ सर्वदलीय विपक्षी पार्टियों ने विरोध कार्यक्रम आयोजित किया था। उस वक्त बाबूलाल मरांडी JVM के नेता थे। विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने कहा था कि यदि ये लोग देशद्रोही हैं तो हम भी देशद्रोही हैं!. सत्ता परिवर्तन के बाद बाबूलाल मरांडी फरवरी 2020 में भाजपा में दोबारा शामिल हो गए थे। जब अक्टूबर 2020 को फादर स्वामी को गिरफ्तार किया गया था, तब भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर झारखंड भाजपा के प्रस्तावित नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से पूछा गया था कि वे क्यों खामोश हैं, क्या पार्टी बदलने से जमीर भी बदल गया?

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