क्या सरकार ने किसानों का अपमान किया ?

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कृषि कानूनों के खिलाफ सरकार और किसानों के बीच 14 अक्टूबर से चली आ रहा बातचीत और रूठने मनाने का खेल अब बंद होता दिख रहा है। किसान और सरकार के बीच हुई 11वें दौर की बातचीत के बाद तो करीब करीब यही साफ होता दिख रहा है।      शुक्रवार को 11वीं बार जब सरकार के मंत्री और किसान आमने सामने हुए तो बातचीत कम और इंतजार ज्यादा चला। किसान विज्ञान भवन में करीब 5 घंटे तक रुके लेकिन सरकार के मंत्री और किसानों के बीच बातचीत सिर्फ आधे घंटे के करीब ही हुई, उसमे भी सरकार ने साफ कर दिया कि अब बातचीत के लिए कोई और तारीख नहीं दी जाएगी, अब गेंद किसानों के पाले हैं किसान सरकार के प्रस्ताव पर फैसला लें।

Credit : Amarujala

बैठक के बाद किसान नेताओं ने कहा कि ‘सरकार की प्लानिंग हमें फंसाने की है सरकार सिर्फ आंदोलन खत्म करना चाहती है, सरकार मिठाई में जहर मिलाने की कोशिश कर रही है, फिलहाल हमें सरकार का प्रपोजल बिलकुल भी मंजूर नहीं है, सरकार ने तीन घंटे तक हमें इंतजार कराया, इसके बाद जब वे आए तो बोले कि सरकार की बात मान लीजिए। अब हम मीटिंग करना बंद कर रहे हैं।

मीटिंग के लिए घंटों इंतजार करने को किसानों ने अपना अपमान बताया, उधर बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा

हमने 11 राउंड की बातचीत की, इस दौरान लगातार किसानों को समाधान करने के लिए विकल्प भी सुझाए, आज भी हमने उन्हें कहा है कि सभी विकल्पों पर चर्चा करके आप अपना फैसला हमें कल बताइए।, 12 दौर की बातचीत के बाद भी कोई फैसला नहीं हो पाने का हमे दुख है। फैसला ना हो सकने का मतलब है कि कोई न कोई ताकत है, जो इस आंदोलन को बनाए रखना चाहती है और अपने हित के लिए किसानों का इस्तेमाल करना चाहती है। ऐसे में किसानों की मांगों पर फैसला नहीं हो पाएगा

नरेंद्र सिंह तोमर

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