जेलों में बैठकर गैंगस्टर चलाते हैं अपना गैंग… 28 जेल के है जैमर फ्री… कुछ जेलों में जैमर तक नहीं

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जेल के अंदर बैठे बैठे ही अब गैंग्सटर गैंग को चलाना शुरू कर दिया है. क्योंकि 28 जेल के जैमर फ्री हो गये हैं. इसके वजह से अपराधी वाट्सअप कॉल कर अपना गैंग चला रहे हैं और बाहर अपराध को अंजाम दे रहे हैं. बता दें रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा सहित सभी 28 जेल जैमर फ्री हो गये हैं. 2008 में राज्य के कुल 28 जेलों में से 17 जेलों में टूजी जैमर लगाये गये थे, गिरिडीह, देवघर, गोड्डा, मधुपुर, साहिबगंज, राजमहल, पाकुड़, बोकारो और घाटशिला सहित 11 जेलों में कोई जैमर ही नहीं हैं. जिस वजह से पुलिस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

4जी शुरू होने के बाद राज्य के कई जेलों में लगे 2जी जैमर अब फेल हो गये हैं. थ्री जी 2009-10 में शुरुआत हुई तब राज्य के जेलों में लगे 2 जी जैमर की क्षमता को बढ़ाकर उनसे काम लिया जा रहा था. पर 2014 में फोर जी 4 जी के आने बाद बाद जेलों में लगे टूजी जैमर बेकार हो गये. वहीं दूसरी ओर जेलों में आपत्तिजनक चीजों के इस्तेमाल की सूचना के बाद चेकिंग अभियान चलाया जाता है. इस दौरान मोबाइल और उससे जुड़े सामान बरामद किये जाते हैं. पर इस  जैमर को ठिक करने की पहल नहीं की जाती है. बता दें झारखंड के जेलों में फोर जी जैमर का प्रस्ताव केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय के पास लंबित है. राज्य के जेलों में टूजी जैमर लगाने का काम इसीआइएल कंपनी ने किया था, लेकिन टूजी जैमर सेवा की प्रासंगिकता समाप्त होने के बाद जेल मुख्यालय ने आइजी सुमन गुप्ता के समय थ्री जी जैमर लगाने का प्रस्ताव पूर्व में दिया था. इस पर सरकार के स्तर पर निर्णय होता, उससे पहले ही मोबाइल की फोर जी सेवा शुरू हो गयी. इसके कारण यहां जैमर नहीं लग पाया है. इसका फायदा उठाकर अपराधी जेल के अंदर से ही व्हाट्सएप कॉल करते हैं और घटनाओं को अंजाम देते हैं. इसके कारण पुलिस को परेशानी हो रही है.

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