गृह मंत्रालय का यह पोर्टल साइबर अपराधियों के लिए बना आफत… आप हुए हैं ठगी के शिकार तो यहां करें शिकायत

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गृह मंत्रालय ने देशभर में फैले साइबर अपराधियों को पकडऩे के लिए एक पोर्टल खोल रखा है। इस पोर्टल पर पूरे देश में साइबर अपराध की घटनाओं से संबंधित सूचनाएं तेजी से अपलोड की जाती हैं। इस पोर्टल का फायदा यह हुआ है कि महज कुछ माह के भीतर बिहार-झारखंड के लगभग 400 साइबर अपराधी पकड़े जा चुके हैं। अब ऐसे पकड़े गए अपराधियों को दूसरे राज्य की पुलिस भी अपने केसों में रिमांड कर रही है। पोर्टल पर सूचनाएं अपलोड करने की जिम्मेदारी एसपी या डीएसपी स्तर के अधिकारियों को ही दी गई है।

मंत्रालय से जुड़े एक वरीय अधिकारी ने बताया कि अब एक राज्य के पुलिस अधिकारी, दूसरे राज्य के पुलिस अधिकारी से डाटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं। झारखंड़ का जामताड़ा जिला साइबर अपराध के लिए कुख्यात रहा है। लेकिन यहां के अधिकांश ठग या तो पकड़े गए हैं या फिर उनलोगों ने अपना नया ठिकाना ढूंढ लिया है। बिहार के जमुई जिले का चकाई इन दिनों साइबर अपराध का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। कुछ साइबर अपराधियों ने अपना ठिकाना देवघर के अलावा बिहार के बांका, नावादा, नालंदा और बरबीधा में बना लिया है। इसके अलावा इस गिरोह के कुछ सदस्यों ने राजस्थान के मेवात में भी अपनी जड़े जमा रखी हैं। मेवात के साइबर ठगों का ठगी करने का तरीका बिहार और झारखंड के ठगों से थोड़ा अलग है।

बिहार और झारखंड के ठग, लोगों को लिंक या फर्जी वेबसाइट बनाकर अपनी जाल में फंसाते हैं। कुछ ठग इनाम का भी प्रलोभन देते हैं, लेकिन मेवात के ठग अश्लील तस्वीरों का सहारा लेकर ब्लैकमेल करते हैं। कुछ दिनों पूर्व तक ये लोग खुद को बैंक अधिकारी या कर्मचारी बताते हुए ठगी करते थे। लेकिन, अब धीरे-धीरे इस तरह की ठगी की जानकारी आमलोगों को हो गई। परिणाम स्वरूप नए लोग ठगों द्वारा फैलाए गए जाल में फंसने से बचने लगे। तब ठगों ने नया तरीका ढूंढ़ा। गृह मंत्रालय के पोर्टल से साइबर अपराध के नियंत्रण में पुलिस को काफी मदद मिली है। 40 से 72 घंटे के भीतर किशनगंज जिले के ठारकुरगंज की घटनाओं में सफलता मिली है। अब बैंक भी इस मामले में सावधानी बरत रहे हैं। साइबर अपराध की घटनाओं में कमी भी आई है। -कुमार आशीष, एसएपी, किशनगंज।

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