होली से तीन दिन पहले करें नृसिंह भगवान की पूजा… मनोकामनाएं होंगी पूरी…

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फाल्गुन माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की पूजा की जाती है। एकादशी और द्वादशी तिथि एक ही दिन होने से आज 25 मार्च, गुरुवार को भगवान नृसिंह की पूजा और व्रत किया जाएगा।

रोग, शोक और दोष खत्म

शास्त्रों की माने तो फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नृसिंह द्वादशी मनाई जाती है। इसके बारे में पुराणों में भी बताया गया है। भगवान विष्णु ने आधा मनुष्य और आधा शेर के शरीर में नृसिंह अवतार लेकर राजा हिरण्यकशिप का वध किया था। उसी दिन से इस पर्व को मनाया जाता है। भगवान विष्णु के इस स्वरूप ने प्रहलाद को भी वरदान दिया कि, जो कोई इस दिन भगवान नृसिंह का स्मरण करते हुए, श्रद्धा से उनका व्रत और पूजन करेगा उसकी मनोकामनाएं पूरी होंगी। इसके साथ ही उसके रोग, शोक और दोष भी खत्म हो जाएंगे।

समस्त संकटों से आसानी से छुटकारा

नृसिंह द्वादशी पर व्रत या उपवास रखा जाता है। आज के दिन भगवान विष्णु के नृसिंह रूप की पूजा की जाती है। सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं। साफ कपड़े पहनें और भगवान नृसिंह की पूजा विधि-विधान से करें। भगवान नृसिंह की चंदन, अक्षत, अबीर, गुलाल, फल, फूल, धूप, दीप, अगरबत्ती, पंचमेवा, कुमकुम, केसर, नारियल से पूजा में करें। भगवान नृसिंह को पीला कपड़ा चढ़ाएं। श्री नृसिंह प्रतिमा की पूजा करके उपरोक्त संकटमोचन नृसिंह मंत्र का स्मरण करें। समस्त संकटों से आसानी से छुटकारा मिल जाएगा।

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